मूल अधिकारों की नि:शेषकारी सूची | Disclaimer of Fundamental Rights


 मूल अधिकारों की नि:शेषकारी सूची

संविधान के भाग 3 में प्रगणित मूल अधिकारों की सूची नि:शेषकारी है। अमेरिकी संविधान (9वा संशोधन) अभिव्यक्त रूप से यह कहता है कि अधिकार विलेख में कुछ अधिकारों के प्रगणन का यह अर्थान्वयन नहीं किया जाएगा कि जनता द्वारा विधारित अन्य अधिकार कम हो गए हैं या जनता को उनसे वंचित कर दिया गया है। यह असंक्रमणीय नैसर्गिक अधिकार के सिद्धांत पर आधारित है। जो स्वतंत्र समाज में व्यक्ति के छीने नहीं जा सकते। लिखित संविधान में उनमें से कुछ अधिकारों की प्रत्याभूति देने से वे अधिकार लुप्तप्रयोग नहीं हो जाते जो संविधान के प्रारंभ से पूर्व व्यक्ति में नहीं थे। उदाहरणार्थ राजनैतिक गतिविधियां करने का अधिकार। किंतु इस प्रकार का कोई अधिकार हमारे संविधान में उचित नहीं है। 

Disclaimer of Fundamental Rights

जैसा प्रारंभ के एक निर्णय गोपालन बना मद्रास राज्य में संप्रेक्षण किया गया था, हमारे संविधान के आधीन विधानमंडल प्रभुत्वसंपन्न है किंतु उसकी उनकी प्रभुता को संविधान द्वारा अभिव्यक्त रूप से या आवश्यक विपक्ष द्वारा मर्यादित किया गया है। न्यायालय उनकी प्रभुत्व पर संविधान की भावना या ''नैसर्गिक अधिकार'' अर्थात संविधान के भाग 3 में प्रगणित अधिकारों से भिन्न अधिकार, के सिद्धांतों के आधार पर कोई और मर्यादा अधिरोपित नहीं कर सकते। भारत के संविधान के अधीन मूल अधिकारों का विस्तार न्यायिक निर्वाचन पर ही आधारित होना चाहिए और उच्चतम न्यायालय अनुच्छेद 21 के प्रविषय का विस्तार करके इस दिशा में बहुत आगे बढ़ गया।

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